सह संपादक अर्जुन देवांगन : नारायणपुर: आदिवासी समाज ने विभागों के नाम परिवर्तन पर मांगा जवाब, मुख्यमंत्री को सौंपा 7 सूत्रीय मांगों वाला ज्ञापन
Ten Singh Thakur
Fri, Oct 16, 2026
नारायणपुर: आदिवासी समाज ने विभागों के नाम परिवर्तन पर मांगा जवाब, मुख्यमंत्री को सौंपा 7 सूत्रीय मांगों वाला ज्ञापन
शिक्षा, रोजगार, संवैधानिक अधिकारों और आदिवासी समाज की पहचान को लेकर उठाए सवाल; नाम परिवर्तन के साथ ठोस विकास कार्ययोजना घोषित करने की मांग
नारायणपुर, 16 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ में आदिवासी समाज से जुड़े विभागों के नाम परिवर्तन और उनकी कार्यप्रणाली को लेकर सर्व आदिवासी समाज, जिला नारायणपुर (संभाग बस्तर) ने शासन से जवाब मांगा है। समाज ने मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़ शासन के नाम कलेक्टर नारायणपुर के माध्यम से ज्ञापन सौंपकर विभागों के नाम परिवर्तन का औचित्य स्पष्ट करने तथा आदिवासी समाज के कल्याण और विकास को लेकर ठोस कार्ययोजना घोषित करने की मांग की है।
ज्ञापन में कहा गया है कि पूर्व में आदिम जाति कल्याण विभाग के अंतर्गत आश्रम, छात्रावास एवं विद्यालय संचालित किए जाते थे। बाद में विभाग का नाम आदिम जाति विकास विभाग हुआ और वर्तमान में जनजातीय कार्य विभाग के नाम परिवर्तन को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। समाज का कहना है कि नाम परिवर्तन केवल प्रशासनिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसके साथ आदिवासी समाज के जीवन, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक-आर्थिक स्थिति में वास्तविक सुधार दिखाई देना चाहिए।
विभाग के नाम परिवर्तन का औचित्य सार्वजनिक करने की मांग
सर्व आदिवासी समाज ने मांग की है कि आदिम जाति कल्याण विभाग से आदिम जाति विकास विभाग और जनजातीय कार्य विभाग तक हुए नाम परिवर्तनों के कारण, उद्देश्य एवं अपेक्षित परिणामों की जानकारी सार्वजनिक की जाए। समाज ने यह भी सवाल उठाया है कि क्या नाम परिवर्तन के साथ आदिवासी समाज के विकास के लिए कोई नई नीति, कार्ययोजना अथवा दृष्टिकोण निर्धारित किया गया है।
ज्ञापन में रखीं सात प्रमुख मांगें
1. नाम परिवर्तन का औचित्य स्पष्ट हो: विभाग के नामों में किए गए बदलाव के कारण, उद्देश्य और अपेक्षित परिणामों की जानकारी सार्वजनिक की जाए।
2. आदिवासी शिक्षा व्यवस्था की स्थिति बताई जाए: आश्रम शालाओं, छात्रावासों और अन्य शैक्षणिक संस्थाओं के शिक्षा विभाग में हस्तांतरण की स्थिति, आदेश, उद्देश्य, विद्यार्थियों को हुए लाभ और सामने आई समस्याओं का विवरण उपलब्ध कराया जाए।
3. कल्याण एवं विकास की जवाबदेही तय हो: आदिवासी समाज के शैक्षणिक, आर्थिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक विकास की जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से निर्धारित की जाए तथा योजनाओं के परिणामों की नियमित समीक्षा हो।
4. आदिवासी पहचान और आत्मसम्मान का सम्मान हो: विभाग के नाम और नीतियों के निर्धारण में आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों, बुद्धिजीवियों एवं पारंपरिक नेतृत्व से विचार-विमर्श किया जाए।
5. संवैधानिक अधिकारों को प्राथमिकता मिले: पांचवीं अनुसूची, संविधान के अनुच्छेद 244(1), पेसा अधिनियम, वनाधिकार कानून और ग्रामसभा के अधिकारों के प्रभावी क्रियान्वयन को विभाग की प्राथमिकताओं में शामिल किया जाए।
6. नाम परिवर्तन के साथ ठोस विकास कार्ययोजना घोषित हो: आदिवासी विद्यार्थियों की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, छात्रावासों की सुविधाओं, स्थानीय युवाओं के रोजगार, स्वास्थ्य सेवाओं, सांस्कृतिक संरक्षण तथा जल-जंगल-जमीन से जुड़े अधिकारों के लिए समयबद्ध कार्ययोजना बनाई जाए।
7. विभागीय बदलावों का तुलनात्मक विवरण जारी हो: विभाग के नाम, प्रशासनिक नियंत्रण, बजट, योजनाओं, संस्थाओं एवं जिम्मेदारियों में हुए परिवर्तनों का वर्षवार विवरण सार्वजनिक किया जाए, ताकि समाज इन बदलावों से हुए वास्तविक लाभ का आकलन कर सके।
केवल नाम बदलना नहीं, जमीनी विकास जरूरी
ज्ञापन में स्पष्ट किया गया है कि समाज का उद्देश्य किसी विभाग अथवा शासन की आलोचना करना मात्र नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि प्रशासनिक नाम परिवर्तन के साथ आदिवासी समाज के वास्तविक कल्याण और विकास के प्रति जवाबदेही बनी रहे।
समाज ने शासन से आग्रह किया है कि सभी बिंदुओं पर तथ्यात्मक स्पष्टीकरण देते हुए आवश्यक नीतिगत निर्णय लिए जाएं। साथ ही, शिक्षा, सम्मान, स्वशासन एवं आर्थिक-सामाजिक स्थिति में हुए सुधार का आकलन कर जानकारी सार्वजनिक की जाए।
सर्व आदिवासी समाज की प्रमुख मांग है कि विभागीय नाम परिवर्तन का लाभ केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि आदिवासी समाज के जीवन में शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, अधिकार और विकास के रूप में दिखाई दे।
सह संपादक
अर्जुन देवांगन
9424287527
Cgfastnews24mpcg
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