: बस्तर पंडुम 2025 बेनूर और ओरछा में 18 मार्च को होगा बस्तर पंडुम का आयोजन
Mon, Mar 17, 2025
तेन सिंह ठाकुर
बस्तर पंडुम 2025
बेनूर और ओरछा में 18 मार्च को होगा बस्तर पंडुम का आयोजन
नारायणपुर, 17 मार्च 2025// जनजातीय बाहुल्य बस्तर संभाग की अद्भुत कला और संस्कृति को संरक्षित और संवर्धित करने के उद्देश्य से इस वर्ष बस्तर पंडुम का आयोजन किया जा रहा है। इस आयोजन के तहत जनपद, जिला और संभाग स्तर पर विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा, जिसमें प्रत्येक प्रतिभागी को प्रोत्साहन राशि और यात्रा व्यय भी प्रदान किया जाएगा।यह आयोजन 18 मार्च मंगलवार को शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल मैदान बेनूर और शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल मैदान ओरछा में जनपद स्तरीय प्रतियोगिता के रूप में आयोजित किया जाएगा। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य जनजातीय कला, लोककला, शिल्प, तीज-त्यौहार, खानपान, बोली-भाषा, रीति-रिवाज, वेश-भूषा, आभूषण, वाद्य यंत्र, पारंपरिक नृत्य, गीत-संगीत, नाट्य, व्यंजन और पेय पदार्थों के मूल स्वरूप को संरक्षित करना और कला समूहों के सतत विकास को प्रोत्साहित करना है। प्रतियोगिता में विभिन्न विधाओं में प्रतिभागी हिस्सा लेंगे, जिनमें जनजातीय नृत्य, जनजातीय गीत, जनजातीय नाट्य, जनजातीय वाद्ययंत्रों का प्रदर्शन, जनजातीय वेशभूषा एवं आभूषण का प्रदर्शन, जनजातीय शिल्प एवं चित्रकला का प्रदर्शन, जनजातीय पेय पदार्थ एवं व्यंजन का प्रदर्शन प्रतियोगिता के माध्यम से किया जाएगा। विजेताओं को प्रत्येक विधा में 10,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।प्रोत्साहन राशि का वितरण जनपद स्तरीय प्रतियोगिता हेतु ग्राम पंचायतों को 10,000 रुपये, नगर पंचायतों को 25,000 रुपये, नगर पालिक परिषदों को 50,000 रुपये, नगर पालिक निगमों को 1 लाख रुपये प्रोत्साहन राशि दिया जाएगा। जिला स्तरीय प्रतियोगिता में प्रत्येक दल को 5,000 रुपये (यात्रा व्यय सहित), विधा के प्रथम विजेता को 20,000 रुपये प्रोत्साहन राशि दिया जाएगा। संभाग स्तरीय प्रतियोगिता में प्रथम विजेता को 50,000 रुपये, द्वितीय विजेता को 25,000 रुपये, तृतीय विजेता को 15,000 रुपये एवं सभी प्रतिभागी दलों को 10,000 रुपये (यात्रा व्यय सहित) दिया जाएगा। प्रतियोगिता आयोजन जनपद स्तरीय प्रतियोगिता 10 से 19 मार्च तक, जिला स्तरीय प्रतियोगिता 21 से 23 मार्च तक, संभाग स्तरीय प्रतियोगिता 01 से 03 अप्रैल तक आयोजित किया जाएगा।प्रधान सम्पादकतेन सिंह ठाकुर6264046084
: मुख्यमंत्री ने किया 'बस्तर पंडुम 2025' का लोगो अनावरण*
Thu, Mar 13, 2025
तेन सिंह ठाकुर
मुख्यमंत्री ने किया 'बस्तर पंडुम 2025' का लोगो अनावरण*
बस्तर में शांति स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा बस्तर पंडुम : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय बस्तर के असल जीवन को करीब से जानने-समझने का मिलेगा अवसर बस्तर पंडुम 2025: लोकसंस्कृति और परंपराओं का भव्य उत्सव बस्तर की सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने की अनूठी पहल है बस्तर पंडुम रायपुर, 12 मार्च 2025/ बस्तर के लोग जीवन का हर पल उत्सव की तरह जीते हैं और अपनी खुशी की अभिव्यक्ति के लिए उनके पास समृद्ध सांस्कृतिक विरासत है। बस्तर में शांति स्थापना के लिए हम तेजी से अपने कदम बढ़ा रहे हैं और बस्तर पंडुम के माध्यम से बस्तर के लोकजीवन और लोकसंस्कृति को सहेजने के साथ ही उनकी उत्सवधर्मिता में हम सहभागी बनेंगे। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज विधानसभा परिसर स्थित समिति कक्ष में मांदर की थाप पर नाचते कलाकारों की मौजूदगी में बस्तर पंडुम 2025 के लोगो का अनावरण किया और यह बातें कही। उन्होंने बस्तर पंडुम के सफल आयोजन के लिए अपनी शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह आयोजन सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के साथ ही बस्तर के प्रतिभाशाली कलाकारों को सशक्त मंच प्रदान करेगा। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने बस्तर पंडुम के बुकलेट का विमोचन किया। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि हमारी सरकार बनने के बाद बस्तर का विकास और वहां के लोगों को मुख्य धारा से जोड़ना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता में शामिल रहा है। बस्तर को माओवाद से मुक्त करने की दिशा में हमने तेजी से अपने कदम बढ़ाए हैं। उन्होंने कहा कि बस्तर ओलंपिक और हाल ही में आयोजित अबूझमाड़ पीस हॉफ मैराथन में भी बस्तर वासियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है। यह दर्शाता है कि बस्तर वासियों का विश्वास लगातार शासन के प्रति बढ़ा है और वे क्षेत्र में शांति और अमन-चैन चाहते हैं।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमने बजट में नक्सली हिंसा से ग्रसित रहे पुवर्ती गांव में भी अस्पताल खोलने का बड़ा निर्णय लिया है। नियद नेल्ला नार योजना के माध्यम से हम बस्तर वासियों के मूलभूत जरूरत को तेजी से पूरा कर रहें हैं।मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर के लोग अपनी सादगी के लिए जाने जाते हैं और हर मौके को अपने खास अंदाज में सेलिब्रेट करते हैं । बस्तर पंडुम के माध्यम से बस्तर के असल जीवन को और करीब से देखा जा सकेगा। उन्होंने कहा कि बस्तर पंडुम में नृत्य, गीत, लोककला, लोकसंस्कृति, नाट्य, शिल्प, रीति- रिवाज, परंपरा और व्यंजन सहित विभिन्न 7 विधाओं में प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएगी। श्री साय ने कहा कि बस्तर में खुशहाली हो, लोग भयमुक्त होकर अपने अंदाज में जिये और उन्हें शासन की सभी सुविधाओं का लाभ मिले।इस मौके पर उप मुख्यमंत्री श्री अरूण साव, उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, वन मंत्री श्री केदार कश्यप, कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम, विधायक श्री किरण देव, विधायक सुश्री लता उसेंडी, विधायक श्री विनायक गोयल, संस्कृति विभाग के सचिव श्री अन्बलगन पी. और संचालक संस्कृति श्री विवेक आचार्य मौजूद रहे। *बस्तर की पहचान को दर्शा रहा है बस्तर पंडुम का लोगो* बस्तर पंडुम के लोगो में बस्तर के लोकजीवन को जीवंत रूप में प्रदर्शित किया गया है और यह उनकी सांस्कृतिक पहचान से गहरे से जुड़ा हुआ है। बस्तर के विरासत को बहुत ही कलात्मक ढंग से दिखाने का प्रयास इसमें किया गया है। "बस्तर पंडुम" गोंडी का शब्द है जिसका अर्थ है बस्तर का उत्सव। प्रतीक चिन्ह में बस्तर की जीवनरेखा इंद्रावती नदी, चित्रकूट जलप्रपात, छत्तीसगढ़ का राजकीय पशु वनभैंसा, राजकीय पक्षी पहाड़ी मैना, बायसन हॉर्न मुकुट, तुरही, ढोल, सल्फी और ताड़ी के पेड़ को शामिल गया है। इस प्रतीक चिन्ह के माध्यम से सरल, सहज और उम्मीदों से भरे अद्वितीय बस्तर को आसानी से जाना और समझा जा सकता है। नृत्य, गीत समेत 07 प्रमुख विधाओं पर केंद्रित होगा आयोजन ‘‘बस्तर पंडुम 2025’’ में जनजातीय नृत्य, गीत, नाट्य, वाद्ययंत्र, पारंपरिक वेशभूषा एवं आभूषण, शिल्प-चित्रकला और जनजातीय व्यंजन एवं पारंपरिक पेय से जुड़ी प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। ये स्पर्धाएं तीन चरणों में संपन्न होंगी। जनपद स्तरीय प्रतियोगिता 12 से 20 मार्च, जिला स्तरीय प्रतियोगिता 21 से 23 मार्च, संभाग स्तरीय प्रतियोगिता दंतेवाड़ा में 1 से 3 अप्रैल तक सम्पन्न होगी। प्रत्येक स्तर पर प्रतिभागियों को विशेष पुरस्कार और प्रमाण पत्र प्रदान किए जाएंगे। बस्तर के लोकजीवन और परंपराओं पर आधारित आयोजन होंगे प्रमुख आकर्षण बस्तर पंडुम में बस्तर की पारंपरिक नृत्य-शैली, गीत, रीति-रिवाज, वेशभूषा, आभूषण और पारंपरिक व्यंजनों का शानदार प्रदर्शन होगा। प्रतियोगियों के प्रदर्शन को मौलिकता, पारंपरिकता और प्रस्तुति के आधार पर अंक दिए जाएंगे। आयोजन में समाज प्रमुखों, जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ नागरिकों को विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया जाएगा। प्रतियोगिता के विजेताओं के चयन के लिए एक विशेष समिति बनाई गई है, जिसमें प्रशासनिक अधिकारियों के साथ-साथ आदिवासी समाज के वरिष्ठ मुखिया, पुजारी और अनुभवी कलाकार शामिल रहेंगे। इससे प्रतियोगिता में पारदर्शिता बनी रहेगी और पारंपरिक लोककला को न्याय मिलेगा।प्रधान सम्पादकतेन सिंह ठाकुर6264046084
: जगदलपुर में गांधी शिल्प बाजार का बस्तर सांसद महेश कश्यप ने किया निरीक्षण
Thu, Mar 6, 2025
तेन सिंह ठाकुर
जगदलपुर में गांधी शिल्प बाजार का बस्तर सांसद महेश कश्यप ने किया निरीक्षण
जगदलपुर में दंतेश्वरी मंदिर के सामने स्थिति टाऊन क्लब ग्राउंड में गांधी शिल्प बाजार, हस्तशिल्प प्रदर्शनी एवं बिक्री मेला का आयोजन किया गया है जहां देश के कोने-कोने से आए हस्तशील कलाकारों द्वारा निर्मित अनूठे एवं उत्कृष्ट उत्पादों की भव्य प्रदर्शनी लगाई गई है जिसका आज बस्तर सांसद महेश कश्यप ने फीता काट कर शुभारंभ किया। उद्घाटन समारोह में बस्तर सांसद महेश कश्यप ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। कार्यक्रम में अन्य प्रतिष्ठित गणमान्य व्यक्ति और सम्मानित अतिथि भी शामिल हुए। अपने उद्घाटन भाषण में, सांसद श्री कश्यप ने गांधी शिल्प बाजार जैसी प्रदर्शनियों के माध्यम से भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और बढ़ावा देने के महत्व पर जोर दिया। मुख्य अतिथि ने उपस्थित लोगों से कारीगरों से जुड़ने और उनके काम का समर्थन करने का भी आग्रह किया। गांधी शिल्प बाजार कारीगरों के लिए अपने कौशल का प्रदर्शन करने और व्यापक दर्शकों से जुड़ने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में कार्य करता है। प्रदर्शनी में भारत के कई राज्यों के कारीगरों और बुनकरों के 20 शिल्प रूप शामिल हैं, जिनमें हाथ से बुने हुए वस्त्र, बेंत और बांस के शिल्प, मिट्टी के बर्तन, पत्थर की नक्काशी और बहुत कुछ दिखाया गया है। आपको बता दे गांधी शिल्प बाजार का ये आयोजन 10 मार्च तक रोजाना सुबह 10 से रात 09 बजे तक होगा। गांधी शिल्प बाजार में विभिन्न प्रकार के स्टॉल लगाए गए हैं जहां लोगों को एक ही छत के नीचे विभिन्न प्रकार के क्राफ्ट व शिल्प सामग्री मिलेगी। गांधी शिल्प बाजार का विशेष आकर्षण कोसा साड़ी, ब्लॉक प्रिंट, लेदर क्राफ्ट, ढोकरा शिल्प, ज्वेलरी, बस्तर शिल्प, बाँस शिल्प, एम्ब्रायडरी वर्क, चंदेरी साड़ी, टेराकोटा, उड़ीसा पट्टचित्र, कालीन सिल्क, बनारसी साड़ी, जूट क्राफ्ट, वुड क्राफ्ट आदी है।प्रधान सम्पादकतेन सिंह ठाकुर6264046084